डुमरिया का मलही मेला: आस्था का एक अनूठा मेला

पूर्वी चंपारण के डुमरिया प्रखंड में आयोजित होने वाला मलही मेला बिहार के सबसे पुराने और सबसे अनूठे मेलों में से एक है। यह सभी समुदायों के लोगों द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, जो इसे सांप्रदायिक सद्भाव का एक शक्तिशाली प्रतीक बनाता है। यह जिला पत्रकार रवीश कुमार और लेखक जॉर्ज ऑरवेल का जन्मस्थान भी है।,यह मेला प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है और पूरे क्षेत्र से हजारों भक्तों, व्यापारियों और मनोरंजन करने वालों को आकर्षित करता है। इसमें धार्मिक अनुष्ठानों, पशु व्यापार और सांस्कृतिक प्रदर्शनों का मिश्रण होता है। वातावरण जीवंत होता है, जिसमें लोक संगीत, स्थानीय रंगमंच (नौटंकी) और पारंपरिक मिठाइयों से लेकर कृषि उपकरणों तक सब कुछ बेचने वाले विभिन्न स्टॉल होते हैं।,मलही मेला केवल एक मेला नहीं है; यह इस क्षेत्र की लोक परंपराओं का एक जीवंत भंडार है और ग्रामीण बिहार में समुदाय और विश्वास की स्थायी भावना का एक प्रमाण है, जैसे प्रसिद्ध सोनपुर मेला।
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