जितिया: एक माँ की अपने बच्चों के लिए प्रार्थना

जितिया बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण और कठिन त्योहार है। इस तीन दिवसीय त्योहार के दौरान, माताएँ अपने बच्चों के स्वास्थ्य, लंबी उम्र और समृद्धि के लिए प्रार्थना करने के लिए लगभग 24 घंटे तक भोजन और पानी दोनों से परहेज करते हुए 'निर्जला' उपवास रखती हैं। यह मातृ भक्ति बिहारी संस्कृति में एक मजबूत विषय है, जो छठ पूजा जैसे त्योहारों में भी देखा जाता है।,त्योहार 'नहाय-खाय' से शुरू होता है, जहाँ माताएँ एक पवित्र डुबकी लगाती हैं और एक ही भोजन करती हैं। दूसरा दिन मुख्य उपवास का दिन होता है, जिसे 'खरना' के रूप में जाना जाता है, जहाँ बिना एक बूंद पानी के उपवास रखा जाता है। तीसरे दिन प्रार्थना और अनुष्ठान करने के बाद उपवास तोड़ा जाता है।,यह त्योहार जीमूतवाहन की कहानी से जुड़ा है, एक परोपकारी राजकुमार जिसने सर्प वंश के बच्चों को बचाने के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया था। जितिया एक गहन सांस्कृतिक परंपरा है जो अपने बच्चों के लिए एक माँ के अपार प्रेम और बलिदान को उजागर करती है, एक ऐसा बंधन जो भाई-बहनों के बीच रक्षा बंधन में भी मनाया जाता है।
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