भाई दूज: भाई-बहन के रिश्ते का उत्सव

भाई दूज एक ऐसा त्योहार है जो भाइयों और बहनों के बीच स्नेही बंधन का जश्न मनाता है। यह कार्तिक के हिंदू महीने में शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन मनाया जाता है, जो पांच दिवसीय दिवाली उत्सव के अंत का प्रतीक है। बिहार में, इस त्योहार के कुछ अनूठे और दिलचस्प अनुष्ठान हैं, जो रक्षा बंधन के साथ एक समान भावना साझा करते हैं।,बहनें दिन की शुरुआत अपने भाइयों को श्राप देने और एक कांटेदार फल खाने से करती हैं, जो उनके भाइयों के जीवन से सभी बाधाओं को दूर करने का प्रतीक है। इसके बाद मुख्य समारोह होता है जहाँ बहन अपने भाई के माथे पर 'तिलक' लगाती है और 'आरती' करती है, और उसकी भलाई और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है। बदले में, भाई अपनी बहन को अपने प्यार और सुरक्षा के वादे के प्रतीक के रूप में उपहार देता है।,यह त्योहार मृत्यु के देवता यम द्वारा अपनी बहन यमी (यमुना नदी) से मिलने की पौराणिक कहानी पर आधारित है। यमी ने एक भव्य समारोह के साथ उनका स्वागत किया, और बदले में, यम ने घोषणा की कि इस दिन अपनी बहन से तिलक प्राप्त करने वाले किसी भी भाई को लंबी उम्र प्रदान की जाएगी। भाई दूज भाई-बहन के प्यार का एक हार्दिक उत्सव है, जैसे मिथिला में सामा चकेवा त्योहार।
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